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जिन्दगी कि राहों में निरासा जिन्दगी की राहों में बहुत बार ऐसा होता है की हमें पता भी नहीं होता की लाइफ हमसे क्या चाहती है। हम जो चाहते है और करते हैं सबकुछ उसके उल्टा ही होता है। हमारे सामने कोई रास्ता ही नहीं बचता। लाइफ एकदम मशीन की तरह काम करने लगता है। सबकुछ अपने आप होता है। हमारे हाथ में कुछ भी नहीं रहता। निरासा हमारे साथ कदम-ताल करता हैं। जिससे हम साथ चलने की उम्मीद रखते हैं वह हमें दूर-दूर तक नजर भी नहीं आता। अपनी लाइफ में जो सोचते थे की हम कभी नहीं करेंगे, हमें वही करना पड़ता है। दुनिया विराना सा लगने लगता है। दिल किसी अपने की तलाश करता है। भीड़ में रहते हुए भी हमें कोई दिखाई नहीं देता। हर आदमी मतलबी लगने लगता है। लाइफ का मतलब केवल पैसा ही नजर आता है। रिश्ते-नाते-मित्रता लगता है सबका मोल है जिसे चुकता किए बगैर अपनापन भी नहीं मिलेगा। लेकिन दिल कहता है कि नहीं ये तो रात है , जैसे हर रात के बाद दिन आता है उसी तरह इस रात का भी दिन आएगा। जिन्दगी में फिर एक नया प्रकाश आयेगा। कभी-कभी लगता है कि यह खामोसी किसी आने वाले तूफान के पहले का सन्नाटा है। दिमाग कहता है कि शायद समय हमें उस तूफान से लड़ने के लिए तैयार कर रहा है। हमें उस तूफान से लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए। सही समय का इंतजार तो करना ही पड़ेगा । बस अब अगली कड़ी का ताना बाना बुनने की तयारी के साथ विदा।